चार पहर वंशीवट भटको सांझ परे घर आयौ। जी हां यह वंशीवट स्थान वही है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण रास बिहारी ने द्वापर युग में तरह-तरह की लीलाएं की थीं। यह श्रीकृष्ण की रासलीला की रासस्थली है। श्रीकृष्ण गोचारण के समय इसी वृक्ष के नीचे राधा और उनकी सखियों के साथ रास रचाते थे। आज भी लोगों को यहाँ लगे विशालकाय वृक्ष से बंशी मृदुँग घुंगरू आदि की आवाज सुनाई देती है यह वही स्थान है जहाँ महादेव ने गोपी का रूप धारण कर भगवान श्री कृष्ण के साथ महारास किया। आप को बता दें कि वृन्दावन में गोपेश्वर महादेव के मंदिर से कुछ कदम दूर व यमुना तट के पास स्थित इस प्राचीन मंदिर में महादेव की स्त्री रूप में पूजा होती है।
