देहरादून। उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में अन्य प्रदेशों के लोगों द्वारा तेजी से कृषि भूमि खरीदी जा रही है। इस खरीद पर रोक लगाने के उद्देश्य से पूर्व में भू-कानून बनाने के लिए सुभाष कुमार की समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट से अब प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके बाद सरकार भू-कानून पर नए साल में अहम फैसला ले सकती है। उत्तराखंड राज्य के लिए नया भू-कानून तैयार करने के लिए प्रारूप समिति गठित की गई है, इसलिए प्रदेश हित व जनहित में यह निर्णय लिया गया कि भू-कानून समिति की आख्या प्रस्तुत करने तक या अग्रिम आदेशों तक जिलाधिकारी राज्य से बाहर के व्यक्तियों को कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से भूमि क्रय करने की अनुमति के प्रस्ताव में निर्णय नहीं लेंगे। इसका अर्थ यह है कि उत्तराखंड में कृषि और बागवानी के लिए जिलाधिकारी की अनुमति से जमीन खरीदने पर सरकार ने आखिर नए साल से रोक लगा दी है। सीएम धामी के मुताबिक, चूंकि भू-कानून की प्रारूप समिति अभी अपना काम कर रही, इसलिए फिलहाल यह रोक लगाई गई है। इससे पहले धामी सरकार जमीन खरीदने वालों की पृष्ठभूमि की जांच का फैसला भी ले चुकी है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश जमींदारी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा-154 में वर्ष 2004 में किए गए संशोधन के अनुसार, ऐसे व्यक्ति जो उत्तराखंड में 12 सितंबर 2003 से पूर्व अचल संपत्ति के धारक नहीं हैं, उन्हें कृषि व औद्यानिकी के मकसद से भूमि खरीदने के लिए डीएम से अनुमति लेने का प्रावधान है।
